रविवार, 3 अप्रैल 2016

Main Aur Meri Coffee




                                                          मैं और मेरी कॉफ़ी

                                                             love beans


         तनहा सा रहता था मैं इस तनहा शहर में,  कभी खुद से छिपता , कभी खुद से मिलता था

        अक्सर देर से सोता था , देर से उठता था।

        न जाने कितने बरस हो गए थे मुझसे आलसी को सुबह सवेरे की दुनिया देखे सुने

        आज बैठा हूँ हाथ में कॉफ़ी का मग लिए , जैसे न जाने कितने बरस से हुए खुद के साथ इतने
 
        इतमिनान के साथ बैठे हुए

        कुछ पुरानी बचकानी बातों को याद करता
        कभी किसी बात पर खुद ही हंस पड़ता
        तो कभी आँखें नाम हो जाती

        आज भी वो कैंटीन की शरारते, class में एक दूसरे से शरमाने वाले
        दिन याद आते है

       facebook नहीं था तब
       facebook का मतलब बस face के सामने book का होना होता था

      कोई gmail - cmail भी नहीं थी
      हाँ ख्वाबो की एक female थी

      जिसे पास की stationary से छोटी सी diary खरीदकर
      अपनी कवितायेँ लिखकर देता  था

     वो मेरी कविताओं के उन उलझे शब्दों में खो जाती थी
     और मैं भी उसकी आँखों को देर तक देखता रहता था

     वो देर तक पढ़ती
     और अच्छा  लिखते हो कहकर चली जाती

     और मैं हाथ में कॉफ़ी का मग पकडे
     उसे देर तक दूर तक देखता रहता। ....... 




                                                            Coffee Dream

         कई बार january की कड़ाके की सर्दी में , अपने नरम हाथो से कॉफ़ी पकड़ाती
         तो उसकी नरम मुलायम उंगलिया हाथो को छू जाती थी
         और फिर महीनो सपने आते थे
         वो काली मिर्च , अदरक वाली चाय तो जैसे अब भाती नहीं थी

        और कॉफी,,,,,,,मानो  मैं  आशिक़ सा हो गया था
        कभी दफ्तर की सुबह की कॉफ़ी
       कभी शाम कोई गपशप में कॉफ़ी
       तो कभी ऊँची ईमारत पर घर की खिड़की वाली कॉफ़ी

       मेरा एक दोस्त है chintoo
      जो अक्सर कहता था की
      ज्यादा कॉफ़ी अच्छी नहीं होती

      और यहाँ ये हाल था की एक रात एक हसीं सा ख्वाब आया
      या फिर यूँ कहो कि एक अजीब ओ हसीन ख्याल आया

      ख्वाब में मैं उसके पास उसकी हाथो की छोटी छोटी उँगलियों को अपने हाथो में लिए
      एक coffee cafe में बैठा था
      जहाँ मैं हमेशा की तरह अपनी हलकी काली हलकी कड़वी कॉफ़ी पी रहा था
      और वो ठंडी मीठी cold coffee पी रही थी

      मैं उस काली कड़वी कॉफ़ी को एक मीठे रस की तरह पी रहा था
      और मेरी आँखें छुप छुप कर उसे कॉफ़ी पीते देख रही थी

       तभी अचानक मेरी नज़र दूर बैठे एक वेटर पर पड़ी
       जो बड़ी देर से उसे देख रहा था

        कहना शायद अच्छा नहीं लगता
         पर शायद अपनी आँखें सेक रहा था

        वो डरी सहमी सी बैठी थी
        मैं गुस्से में अपना आपा सा खो बैठा था
       
        तभी मैंने वेटर को अपने पास बुलाया
        और उस काली कड़वी कॉफ़ी को उसको एक झटके में पिलाया

        और तभी सुबह खिड़की से वाली सूरज की एक किरण ने मेरी आँखों को खोल जगा दिया

        तो आगे क्या हुआ कभी जान ही नहीं पाया 
       
       अब सोमवार का दिन, न कोई त्यौहार था और न कोई बैंक holiday
       दफ्तर जल्दी जाना था , तो दोबारा सोकर आगे क्या हुआ कभी जान ही नहीं पाया
       तो सपने को वहीँ छोड़ अपनी कॉफ़ी पी दफ्तर के लिए निकल गया

      हाँ रास्ते में chintoo याद आया
      मेरा दोस्त ,  जो अक्सर कहता कि कॉफ़ी  अच्छी नहीं होती



                                                               Empty Mug

   
        कल बड़े दिनों  के बाद उसे एक common friend की शादी में देखा , वो काली चमकीली साड़ी, माथे पर छोटी सी बिंदी, होठों पर हलकी सी लाली और बाल पहले से छोटे थे पर अच्छे लग रहे थे।
मैं दूर एक table पर बैठा coffee पी रहा था
और वो अपने चार दोस्तों के साथ खड़ी हंस रही थी
मुस्कुरा रही थी , और मेरी आँखें फिर से एक बार उसे छुप छुप कर देख रही थी

देखते देखते मुझे वो दिन याद आया जब शाम को कॉफ़ी देते हुए उसने मेरे कपड़ो पर गिरा दी थी , और मैं गुस्से में उसे डांटने लगा था और वो नाराज़ होकर चली गयी थी।  और अगले दिन वो अपनी family के साथ mumbai जाने वाली थी
मैं अगली सुबह उसके घर माफ़ी मांगने भी गया था , पर वो जा चुकी थी
सोच रहा था कहीं वो आज भी नाराज़ तो नहीं, क्या वो मुझसे बातें करेगी, तभी अचानक उसने मेरी और देखा और मैं बस एक छोटे बच्चे की तरह सिर छुपाकर  कॉफ़ी पीने लगा और सोचने लगा क्या उसने देखा मुझे

तभी अचानक किसी ने मुझे HI! कहा, मैंने अपना सिर कुछ ऊपर किया तो देखा वो जो सपनो में थी आज मेरे सामने हक़ीक़त बनी खड़ी थी।
मैं उसे देख उसकी यादों खो सा गया था और मेरे कोई जवाब न देने पर उसने फिर से मुझे HI! कहा , मैं कुछ चौंका और खुद को यादों से बाहर निकाल, उसकी और देख मैंने भी उसे HI! कहा
उसने पूछा , how are you, Rahul
मैंने कहा , " I am fine , तुम कैसी हो
उसने मेरी और देख कहा , " मैं अच्छी हूँ
मैंने भी मुस्कुराते हुए उसे देखते हुए कहा , " हाँ , तुम आज भी बहुत अच्छी हो
उसने पूछा मुंबई कब आये
मुंबई आये मुझे कुछ एक साल हो चूका था
पर मैं शायद उसे फिर से नाराज़ नहीं करना चाहता था
इसलिए बस कुछ हफ्तों पहले आया हूँ कह दिया

मैंने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा और पूछा , " कॉफ़ी पियोगी
उसने कहा , " अगर तुम्हारे कपड़ो पर गिरी तो डाँटोगे तो नहीं

मैंने बताया की मैं अगले दिन तुम्हे sorry कहने आया था
उसने हसकर कहा, " कोई नहीं तब नहीं कह पाए , तो अब कह दो

उसके बाद हम देर तक बातें करते रहे
रात काफी हो चुकी थी
उसके छोटे काले बालों की तरह
हल्के बादल भी छाए थे

उसके सभी दोस्त जा चुके थे , उसने मुझे खुद को घर drop  करने के लिए बोला और हम अपने जूतों को हाथो में लिए नंगे पाओं समुद्र के किनारे ठंडी रेत पर चलते रहे

हलकी धीमी हवा में बारिश की बूँदें फव्वारे की तरह चेहरे पर पड़ रही थी, उसकी साड़ी हवा में लहर कर बार बार मेरी उंगलियों को छू रही थी, वो रात मेरे लिए एक सपने जैसे थी

चलते चलते कब उसका घर आ गया पता ही नहीं चला
उसने मुझे अंदर आकर कॉफ़ी पीने के लिए कहा पर रात काफी हो चुकी थी , और सुबह office जल्दी जाना था
इसलिए फिर कभी कहकर , मैं फिर उन तनहा गलियों के उस तनहा से घर की और चल पड़ा , जहाँ मैं रहता था।

उस रात मन में अजीब सी ख़ुशी थी, मैं उस सिमटी हुयी चादर पर देर तक आँखें खोले लेटा रहा, सोच सोच कर मुस्कुराता भी रहा और फिर पता नहीं कब मेरी आँखें बंद हुयी और मैं सो गया

अब हम अक्सर मिलते थे , कभी ऑफिस के पास वाले कैफ़े में , कभी जुहू की चौपाटी पर घंटो बातें करते थे
अब मैं उसे वो अपनी collage वाली poem नहीं सुनाता था , पर बातों ही बातों में उसे चाहता हूँ ये कई बार कह जाता था

एक दिन देर रात उसका फ़ोन आया और कहने लगी की सुबह पापा ने कॉफ़ी पर बुलाया है
बस ये कहकर फ़ोन काट दिया और मैं उसके बाद देर तक सोचता रहा

सुबह आँखें जल्दी खुल गयी थी , और आज मैं घर से कॉफ़ी पीकर नहीं निकला , उसका घर कुछ आधे घंटे की दूरी पर था तो मैं पैदल ही निकल गया

मैंने घर के बाहर लगी एक jingle bell सी दिखने वाली bell को हलके से बजाया

कुछ देर तक कोई नहीं आया मैं फिर से बजाने वाला था कि तभी "कौन है" की आवाज़ आई

मेरे कुछ कहने से पहले दरवाजा खुल गया, दरवाजे पर आंटी खड़े थे , मैंने aunty  को good morning कहा

aunty ने अंदर आने को कहा और डाटना शुरू कर दिया , कहने लगी इतने दिन हुए कभी मिलने क्यों नहीं आये
तभी uncle भी आ गए  और उन्होंने मुझे balcony में पड़ी chair पर बैठने के किये बाहर बुलाया और aunty को कॉफ़ी बनाने के लिए कहा

अंकल मेरे साथ बैठकर कई नयी पुरानी बातें करने लगे, मैं uncle की बातों से बोर होने लगा था
कुछ देर बाद सीढ़ियों से नंगे पांव भागती हुयी वो भी आ गयी

कुछ देर बाद aunty सबके लिए कॉफ़ी लेकर आ गयी

कॉफ़ी पीते - पीते uncle ने मुझसे उसकी शादी की बात की
और कहने लगे कि तुम्हारी नज़र में कोई अच्छा लड़का हो तो बताना , सपना की शादी के लिए
हाँ , सपना जो पिछले कई सालो से अब तक मेरे लिए भी सपना ही है , जिसे मैं साफ़ सीधे तौर पर कभी बता नहीं पाया , कि उस सपना को मैं अपने सपनो से निकल हक़ीक़त में पाना चाहता था

पर मुझे अक्सर लगता था कि मैं इतना बुरा तो नहीं हूँ, पर शायद uncle को एक अच्छा लड़का चहिये था।

उस दिन मैं वो काली कड़वी कॉफ़ी पी नहीं पा रहा था


उस रात एक अजीब सा एहसास हो रहा था जैसे खिलखिलाती धुप पर अचानक बदल छा गए हो , बूँदें भी गिरने लगी थी और मैं खुद को एक बेशाख से पेड़ के नीचे छुपाए बैठा हूँ

मैं रात भर सोच ही रहा था तभी सुबह के लगभग 5 :00 बजे मेरे फ़ोन की घंटी बजने लगी
मैंने खुद को सोच से जगाया और देखा , सपना का फ़ोन था।
सपना ने धीमी सी आवाज़ में कहा , " आज शाम को मिल सकते हो, कुछ जरुरी बात करनी है।
मैंने कहा , " हाँ , जरूर , क्या हुआ तुम ठीक हो

उसने कहा , " हाँ मैं ठीक हूँ , बाकि मिलकर बताती हूँ
और ये कह , सपना ने फ़ोन काट दिया

मैं शाम को अपने office के पास वाले cafe में उसका इंतज़ार करने लगा और मेरे दिल की धड़कन रेल के इंजन की तरह बड़ी ज़ोर से धड़क रही थी।  मेरे पैर भी काँप रहे थे।  शायद मैं काफी घबराया हुआ था , रह रह कर अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे।

कुछ देर इंतज़ार करने के बाद सपना भी आ गयी , मैं कॉफ़ी order कर चूका था।
वो आकर मेरे सामने कुछ देर चुप बैठी रही , और मैं उसकी आँखों को छुप छुप कर देख पढ़ने की कोशिश कर रहा था

वो कुछ कहना चाहती थी , पर मैं पूछ नहीं पा रहा था
और आज उसकी आँखें भी चुप थी , तो मैं कुछ समझ नहीं प रहा था।

इससे पहले मैं अपनी कॉफ़ी खत्म करता ,उसने मुझे उठने के लिया कहा , और कहने लगी मेरे साथ मेरे ऑफिस चलो।
और मुझे संग खींच अपने office ले गयी
उस दिन न मैं उसकी आँखों को सुन प रहा था और न उसके हाथो के हलके से स्पर्श को महसूस कर पा रहा था
आज मैं उसकी चुपी में उलझ सा गया था

उसने मुझे ऑफिस के waiting room में wait  करने के लिए कहा
मैं वहां बैठा कॉफ़ी  हुए उसका इंतज़ार करने लगा और मैं इस इंतज़ार   पहेली में फंसता जा रहा था।
कुछ देर बाद वो waiting room में अपने एक दोस्त के साथ आई।
अब शायद पहेली सुलझने वाली थी
 ये इंतज़ार खत्म होने वाला था
और मेरी कॉफ़ी भी

उसने मुझे अपने उस दोस्त से मिलवाया और कहा , राघव , ये अच्छा लड़का है
वो तेज़ धड़कती धड़कने बस रुकने ही वाली थी की तभी कॉफ़ी की उस आखरी sip पी कर।, मैंने फिर एक बार खुद को समझाया।

कुछ महीनो बाद उनकी शादी
 शादी में मैं भी गया था

पर सपना अभी भी एक खूबसूरत सपना है
याद है
और कॉफ़ी मैं आज भी पीता हूँ











     














     

       

     
                 











शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

JAAG




                                                                     जाग 





 तू मुझ में जाग है रही
मैं तुझ में यूँ सोया हूँ
तू मुझ  में हस्ती है आज भी कहीं
मैं  तेरे सारे आंसू यूँ रोया हूँ
जो हो रहा है ये
इस बात का नहीं गम
नींद होगी तेरी भी कुछ इस तरह
न जाने क्यों ले बैठा हूँ मैं ये भर्म





रविवार, 7 फ़रवरी 2016

Sweet September (Chapter 2)

                                                    SWEET SEPTEMBER ( अध्याय २ ) 


एक दिन शाम को  सबके चले जाने के बाद मैंने अनु को रिक्शा स्टैंड पर काफी देर तक रिक्शा का इंतज़ार करते देखा , मैं उसके पास जाकर उसे उसके घर तक छोड़ने के लिए पूछना चाहता था , पर पहले तो हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी पर फिर अनु को यूँ इंतज़ार कर मैं बिना सोचे समझे अपनी बाइक अनु के सामने जा खड़ी कर, उसे बैठने के लिए बोला 

अनु ने कहा।, " नहीं , थोड़ी देर में रिक्शा आ जाएगी, इससे पहले अनु कुछ और कहती 
मैंने कहा, " बैठ जाओ , वैसे भी 15 मिनट से तो कोई रिक्शा आई नहीं।  

उसके बाद अनु बिना कुछ कहे , मेरी नीली बाइक पर बैठ गयी , और मुझे सब कुछ बस एक सपना सा लग रहा था , पर मैं खुश था।  
अनु PG में रहती थी , पर वहां जाने का रास्ता वो खुद भी नहीं जानती थी,  उस दिन हम उस 15 मिनट के रास्ते में लगभग 1 घंटा इधर उधर घूमते और बातें करते रहे।  
उस दिन उसे उसकी PG वाली गली के बाहर ड्राप कर , मैंने अनु से कहा , "तुम इस अनजान शहर में  अपने PG का रास्ता जाने बिना एक रिक्शा वाले पर भरोसा कर चली आती हो 

अनु ने हस्ते हुए मुस्कुराते हुए कहा , " अच्छा तो फिर किस पर करू 
मैंने भी हक़ से कह दिया, " चलो आज के बाद तुम्हे तुम्हारी PG वाली गली से पिक करने और शाम को ड्राप करने की ज़िम्मेदारी मेरी 

अनु ने कहा , " पर, तुम्हे दूर पड़ेगा 
उसकी ये बात सुन मैं मन ही मन सोचने लगा , अगर तुम पास हो तो फिर शायद कुछ भी  दूर नहीं। 

पर मन की बात मन में रख मैंने कह दिया , " मैं नहीं जानता कल सुबह 7 बजे मैं तुम्हारा यहीं इंतज़ार करूँगा 

अब हम अच्छे दोस्त बन गए थे , मैं रोज़ सुबह ठीक 7 बजे उसकी PG वाली गली के बाहर उसका इंतज़ार करता और वो हमेशा वक़्त से 5 मिनट लेट आती, अब वो मेरे पास वाली 2nd वाली सीट पर मेरे साथ बैठती थी और हम दिन भर खूब बातें करते थे इतना ही नहीं  मैं रोज़ सुबह उसे उसके PG वाली गली के बाहर से pick करने के बाद हम सुबह सुबह ट्रेनिंग सेंटर के पास वाले CCD जाते जहाँ वो अपनी मनपसंद choco brownie खाती और मैं कभी कभी कॉफ़ी पी लेता था। वैसे इतनी सुबह कोई CCD नहीं खुलता पर लगता है जैसे ये CCD सिर्फ उसके लिए  खुलता था, जहाँ वो अपनी मनपसंद मीठी choco brownie खा सके।  कई बार choco brownie खाते हुए उसके बालो की एक लट उसके चेहरे पर गिरती और खिड़की से आती हलकी हलकी हवा में उसे सहलाती और अनु के हाथ चॉकलेट से भरे होने के कारण वो उस एक लट को बार बार पीछे न कर पाती , और मैं अक्सर सोचता की मैं उस लट को  अपने हाथो से उसके झुमके से सजे कान के पीछे कर उस लट से कह सकू  की अब तुझे बार बार आगे आ उसकी खूबसूरती को सहलाने की जरुरत नहीं , " मैं हूँ न " 

शाम को अनु को उसकी pg वाली के बाहर DROP करते हुए हम अक्सर रास्ता भूल जाते थे, और घंटो कभी सही और  कभी किसी गलत मोड़ पर घूमते रहते पर उसके साथ सफर कितना भी लम्बा हो हमेशा छोटा ही लगता था। उसको उसकी pg वाली गली के बाहर ड्राप कर हम वहां  खड़े होकर घंटो गप शप करते और अक्सर BYE कहकर गली की और जाते हुए अपने हलके से BAG का भारी बोझ लिए पीछे मुड़ती और फिर मुझे देख मुस्कुरा अपने छोटी छोटी उंगलियो वाले हाथो को हिला फिर BYE  कहती , और मैं भी उसका हर रोज़ तब तक इंतज़ार करता जब तक वो एक बार पीछे मूड , मुस्कुरा BYE न कहती।

यूही एक एक कर ट्रेनिंग के दिन कम हो रहे थे और मौसम में सर्द बढ़ रही थीं और मौसम में बदलाव क्या आया एक दिन अनु को झुखाम हो गया , उसे कभी गुस्सा नहीं आता था शायद जिस नाक पर गुस्सा होता है वहां तो हमेशा झुखाम ही होता था और मैं जो रोज़ सुबह अपने लिए LUNCHBOX  भी नहीं ले जाता था मैं राहुल शर्मा रोज़ उसके लिए अदरक वाली "GREEN Tea " बनाकर ले जाता था , आपको लगता होगा आखिर क्या हुआ था मुझे जो मुझे उसकी हर हंसी-ख़ुशी, दिन -रात , उसकी तारीफ़ , उसकी परवाह सब मीठी मीठी लगने लगी थी। 
हाँ , मुझे अनु से प्यार हो गया था , मैं हर पल , हर लम्हा , हर दिन , हर रात , हर दुःख , हर सुख बस उससे और उसके चाहता था। पर यहाँ  मैं इतना कुछ तय कर चूका था पर वो क्या सोचती इस बारें में सोचा ही नहीं था , और इधर  ट्रेनिंग के दिन धीरे धीरे धीरे खत्म हो रहे थे , पर अपने बारें में बताने से पहले मैं उसके बारें में जानना चाहता था।  

और इसी तरह एक दिन उसे PG की और ड्राप करने जाते हुए , मैं उससे उसके BOYFRIEND के बारें में पूछने की सोचने लगा , और वैसे भी हम इतने अच्छे दोस्त बन  चुके थे की एक दूसरे से  कुछ भी पूछ सकते थे कह सकते थे ,  और उस दिन उसकी PG वाली गली  के बाहर उसे अलविदा कहने से पहले मैंने बड़ी बेबाकी से  अनु से पूछा , " अनु, क्या तुम्हारा BOYFRIEND है।  

इस बात पर अनु रुक गयी , और उसने थोड़ा आगे आ कहा , " हाँ , है  या शायद था , और फिर खुद को इस दुविधा से निकलने के लिए कहा , छोड़ो लम्बी कहानी है। 
उसकी इस हाँ और न के जवाब ने शायद मुझे एक बड़ी दुविधा में डाल दिया था।  
मैंने अपनी बाइक से KEY निकाल  और उतरकर उसकी और चेहरा कर बैठ , कहा , " मेरे पास तुम्हारे लिए काफी वक़्त है या शायद सिर्फ तुम्हारे लिए वक़्त है ,  ये शायद वाली बात मैंने मन ही मन में कही।  

मेरे कहने पर अनु ने कहा , " तुम सब जानते हो न , तुम्हे पता है मैं अब बिनाए बताये नहीं रहूंगी। 
मैंने कहा , "नहीं, मैं इतना तो नहीं जानता , पर हाँ मैं बिना जाने नहीं जाऊंगा, ये जानता हूँ।    

और फिर अनु ने सब बताया , की किस तरह उनमे प्यार हुआ और कैसे वो आज भी उसे वापस ले आना चाहती है।  पर ये कहानी उसकी है मेरी नहीं , तो यहाँ मैं राहुल शर्मा सिर्फ अपनी कहानी बताऊंगा।  

अनु कभी रोती  नहीं थी , पर आज मैंने उसकी उन हंसती हुयी आँखों में नमी देखी, जिसे वो अपने होठों की मीठी मुस्कराहट के पीछे छुपाये रहती थी।  और मैं शायद रोना चाहता था पर मैं रो भी नहीं सकता था , पर मेरा प्यार सिर्फ उसे पाना नहीं शायद उसकी ख़ुशी भी मेरा प्यार थी , और अगर उसकी ख़ुशी उसके प्यार को पाने में थी , तो मैंने  भी अभी अभी अपनी बंद  मुठी से निकले सपनो को फिर उन्ही मुठी दफ़न कर उसके करीब आ , हल्के से गले लगा , कह दियां: 

तुम्हारी आँखों की नमी देख सकता हूँ मैं 
तुम्हारी ज़िन्दगी की कमी देख सकता हूँ मैं 
तुम्हे अपनी उँगलियों से लिख सकता हूँ मैं 
अगर तुम भी कभी अपनी आँखों से नमी के परदे हटा कर देखो 
तो तुम्हे भी दिख सकता हूँ मैं।  

मुझे नहीं पता ये बात उसे कितनी समझ आई , और मैंने फिर अनु से कहा , " अगर तुम यही चाहती हो, तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ , तुम्हारे आस पास हूँ। 
और फिर अनु रोज़ की तरह मुस्कुरा कर मुझे अलविदा कह अपने PG की और चल पड़ी। और मैं उसे  उस दिन उसके दूसरी गली में मुड़ जाने तक देखता रहा।  

   










  















रविवार, 10 जनवरी 2016

Sweet September (chapter 3)



                                                              Sweet September

                                                                  (अध्याय ३)


 मैं मन ही मन उसे उसकी चाहत से मिलाने का वादा कर तो आया  पर उस रात एक अजीब सी कश्मकश ने  मुझे सोने नहीं दिया, मैं पूरी रात कभी मुस्कुराता तो कभी उदास हो जाता, कभी उसके साथ बिताये लम्हों से मेरे चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती तो कभी उसके दूर चले जाने के डर से आँखें नम हो जाती। आखिर ट्रेनिंग भी खत्म होने को थी. मेरे पास सिर्फ 5 दिन थे.
अगले दिन ट्रेनिंग रूम में सब के चेहरों पर ट्रेनिंग खत्म होने की ख़ुशी थी वो भी खुश ही नज़र आ रही थी और मैं कुछ परेशान सा था
मैं जानता था  वो जो कभी मेरी न हो सकेगी मैं न जाने कभी का उसका हो चुका था।   वो मुझसे प्यार नहीं करती ये जनता था मैं पर  मैं उससे प्यार करता हूँ ये बात उसको बताना चाहता था और किसी कविता, कहानी या संगीत के जरिये नहीं बस उसके सामने  बैठ उसकी आँखों में आँखें डाल साफ़ साफ़ कह देना चाहता था ,
" अनुष्का मैं तुम्हे पसंद करता हूँ , हाँ मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ ,
पर सब जानते हुए  बात को उसके आगे बिछा देने की हिम्मत भी न थी

फिर एक दिन हम पास के एक मॉल में शाम को ट्रेनिंग के बाद मैं उसे एक नए cafe " chocolate Factory"  ले गया।  मुझे चॉकलेट पसंद नहीं तो मैं बस कॉफ़ी पी रहा था और वो कॉफ़ी के साथ अपनी मनपसंद चॉकलेट भी खा रही थी  लगता था जैसे उसके गुलाब से होठों पर चॉकलेट की परत चढ़ गयी हो।  होठों पर लिपटी उस चॉकलेट को देख  आज मैं भी चॉकलेट खाना चाहता था. मैं हमेशा की तरह आज भी मेरी आँखें उसे छुप छुप कर देखती रही,  उस दिन मैं काफी चुप थापर मेरी आँखें बहुत कुछ कह रही थी पर हमेशा की तरह वो मेरी आँखें पढ़ नहीं सकती थी, और उसे कुछ कह देने की मैं हिम्मत ही नहीं कर पा रहा  था.

राहुल चले, " मैं सोच ही रहा था तभी अनु ने चलने के लिए कहा
कहने लगी , " राहुल हम काफी लेट हो चुके है हमें चलना चहिये नहीं तो PG में entry नहीं मिलेगी और आज हम रास्ता नहीं भूलेंगे

 सच तो ये है मैं हमेशा से रास्ता जनता था बस उसके साथ अपना सफर लम्बा करना चाहता था पर आज हम लेट हो चुके थे और मैंने रास्ता बिना भूले उसे टाइम से पहले उसकी PG  वाली गली के बाहर drop किया और आज हमने हमेशा की तरह उसकी PG वाली गली के बाहर खड़े होकर बातें भी नहीं की बस जाते हुए आज उसने अपनी हलकी प्यारी सी मुस्कराहट के साथ कहा , " आज तुम काफी चुप थे पर तुम्हारी आँखें कुछ कहने की फ़िराक में थी , और मैं आँखों की बातें नहीं सुन सकती ये तुम जानते हो, तो अगर कोई बात है तो तुम मुझे बता सकते हो।
उसके ये कह देने पर मैंने उसके छोटे से चेहरे को अपने हाथो में ले उसे माथे से चूमकर कहा , " नहीं अनु मैं ठीक हूँ बस कभी कभी तुम्हारी फ़िक्र लगी रहती है

बस इतना कहते ही अनु ने अपने हाथो को आसमान की और उठा हवाओं में फैला कहने लगी, " मुझे क्या होगा देखो मैं आज कितनी खुश हूँ ,  और उसकी वो ख़ुशी वो हंसी देख जो मुझे भी मीठी मीठी सी ख़ुशी देती थी, मैं भी मुस्कुरा दिया और हलके से गले लगा कहा , जाओ अनु तुम लेट हो रही हो
और  फिर एक दूजे को अलविदा कह अपने अपने अपने घर की और चल पड़े।

अब ट्रेनिंग के बस 4  दिन रह गए थे और मैं उसे बिना अपने दिल की बात बताये जाना नहीं चाहता था।   और उस रात मैंने फिर से खुद एक बार समझा फैसला किया की अब मैं अपने प्यार का इज़हार कर के रहूँगा

ट्रेनिंग से  3 दिन पहले,  मैं उस दिन ट्रेनिंग के खत्म होने और शाम होने का इंतज़ार करता रहा पर मानों  जैसे उस दिन ट्रेनिंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी, हर पल हर लम्हा बहुत दुर्लभ और लम्बा हो रहा था और आख़िरकार एक लम्बे इंतज़ार के बाद शाम  हो गयी ,  खत्म होने के बाद मैंने अनु को कॉफ़ी के लिए पूछा ,  पर अनु ने कहा मुझे भूख लगी है
मैंने कहा ठीक चलो कुछ खाने चलते है
और हम पास में "Burger Girl"में  burger  खाने चल पड़े।

मैं आज भी चुप था सोच रहा था की कहू या नहीं , मैं कहने और न कहने की एक गहरी असमंजस में था मेरी सांसें रुक रुक कर आ रही थी , मेरे हाथ में एक पानी की बोतल थी जो मैं घबराहट में लगभग पूरी पी चूका था।  कुछ देर बाद हम "Burger Girl " पहुँच गए , मैं यहाँ पहले कभी नहीं आया था तो शायद आज सब कुछ नया सा ही होने वाला था मेरे साथ
 हम दोनों ही veg थे , उसने एक burger के साथ ice tea order की और मैंने भी।

उसने आज एक पीले रंग का सूट पहना था , और आज उसके बाल  रोज़ की तरह परेशान नहीं थे और उसके माथे के बीच छोटी सी बिंदी भी थी  , कुछ देर चुप चाप उसे देखने के बाद मैंने बड़ी बेबाकी से कहा, " अनु तुम बहुत खूबसूरत हो।
 इससे पहले वो कुछ कहती हमारा आर्डर आ चुका था.
burger खाते हुए हम कुछ ख़ास बातेंनहीं कर रहे थे ,  कुछ देर बाद कुछ bites और sip लेने के बाद
अनु ने धीमी सी आवाज़ में मुझसे कहा , " राहुल मुझे लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो मैंने इतना चुप तुम्हे कभी नहीं देखा
मैंने कुछ चोंक कर अनुष्का की और देखो मानो  किसी ने मुझे किसी गहरे सपने से जगा  दिया हो ,
 मैंने कुछ देर चुप रहने के बाद , दबी दबी सी आवाज़ में  कुछ देर सोचा और कहा, " नहीं कुछ नहीं, I M OK ,
अनु ने कहा , देखो ये बात सही नहीं है मैं हमेशा तुम्हे सब कुछ बताती हूँ, और तुम कभी कुछ नहीं बताते , और मैं जानती हूँ तुम कहना चाहते हो , तो तुम मुझे बता सकते हो
ये सुन मैं फिर चुप रहा, मेरी कुछ देर की चुपी के बाद अनु ने फिर से कहा , " तो तुम बता रहे हो

पर मैं  कुछ भी कहने की हिम्मत जुटा ही नहीं पा  रहा था,  फिर एक bite खाकर और ice tea की दो sip के बाद मैंने कुछ हिम्मत जुटाई, मेरे पैर काँप रहे थे , दिल की धड़कन तेज़ी से भाग रही थी. मेरी नसों में खून जम सा गया था.  हिल ही नहीं पा रहा था।  सिर्फ ये सोच कर की अब कहूँगा तोह उसके बाद क्या होगा, पर कहना तो था.

और फिर थोड़ी हिम्मत जुटाकर मैंने कहा , " अनु , मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

अनु ने कहा , " हाँ बोलो
मैंने अपने शब्दों को कुछ रोक रोक कर कहा, " अनु, i think i like you. and i like u more than a friend , हाँ अनुष्का मैं तुमसे प्यार करता हूँ ये बात मैंने आज कह तो दी थी ,

पर मेरे ये कहने पर अनु कुछ देर के लिए चुप हो गयी, मुझे डर था की कहीं ये चुपी के तूफ़ान में मेरे बिछाये  गए दिल के टुकड़े बिखर न जाये।
कुछ  चंद लम्हों तक हमारे बीच छुपी छायी रही और मैं  इंतज़ार कर रहा था. कि मेरे प्यार के बिछाये टुकड़े न सिमट रहे थे और न उड़ रहे थे
कुछ देर उसे चुप बैठा देख, मैंने भारी सी सांस भरी और कहा , " देखो burger तो खत्म करो और मैं जानता हूँ अनुष्का तुम किसी और को चाहती हो पर मैं बस अपने दिल  बताना चाहता था.

उसने हलकी सी सांस भर , बस हम्म्म,कहकर जवाब दिया।
मैं नहीं जानता वो कुछ कहना भी चाहती है या नहीं, बहुत देर तक कोई जवाब न मिलने  बाद मैंने उसके हाथो को अपने हाथो में लेकर कहा, " relax अनु तुम्हे कुछ कहने की जरुरत नहीं पर मैं  एक अच्छे दोस्त की तरह हमेशा तुम्हारे साथ , तुम्हारे आस पास रहूँगा।
और मैं अपने बिछाये हुए प्यार के टुकड़ो को समेट उसे अपनी नीली बाइक पर बिठा  उसके pg की और चल पड़े

रास्ते में काफी देर तक दूर तक वो भी चुप रही और मैं भी सोचता रहा , कहीं मैंने कुछ जल्दी या कुछ ऐसा तो नहीं किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था।
मेरे दिमाग में सोच के घोड़े दौड़ ही रहे थे की तभी हर  बार की तरह अपनी प्यारी मुस्कुराती आवाज़ में बोली ,
सुबह तुम मुझे 6 बजे लेने आ जाना , कल सुबह लेने आओगे न

हाँ जरूर, " मैंने झट से बोला मानो  जैसे मैं न जाने कब से उसके कुछ कहने का इंतज़ार कर रहा था

आज उसे छोड़ के जाने का मन न था, आज लगता था जैसे मैं अपने घर की और नहीं शायद अपना घर छोड़कर जा रहा था।
और अब मेरे पास 1 आखरी दिन था , उसे देखने महसूस करने का ,बस एक दिन था।

ट्रेनिंग का आखरी दिन जब हर चहरे पर एक ख़ुशी का आसमान था जैसे आज सब आज़ाद हो उड़ने की तयारी में हो और मैं आज आसमान से जमीन की और गिर रहा था , आज मैं अपनी उदासी भी छुपा नहीं पा रहा था ,
अनु आज माथे पर लाल बिंदी और सुलझे बालो में गजब की सुन्दर लग रही थी , मैं उसे अंतहीन लम्हों तक देखना चाहता था पर आज समय की सुइयां बहुत तेज़ी से भाग रही थी , सुबह से कब शाम हो गयी पता ही नही चला।
मैं जानता था हम बिछड़ने वाले है , और मैं इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था , और आज मेरी  उसे उसकी PG वाली गली के बाहर अलविदा कहने की हिम्मत सी न थी , ट्रेनिंग खत्म होने पर मैं वहां से शायद किसी को भी अलविदा कहे बिना जाने वाला था , पर तभी अनु मेरे पास आई और कहने लगी तो चले , " और अब जब अनु ने कह ही दिया था फिर तो जाना ही था।

हम आज आखरी बार फिर पहली बार की तरह रास्ता भूलते हुए उसके घर की और चल पड़े , कुछ आधा घंटा बाद हम घूमते फिरते उसकी झीनी झीनी खुश्बू के साथ मीठी मीठी बातें करते उसके घर के बाहर पहुंचे

उसे अलविदा कहने से पहले मैंने हलकी सी आवाज़ में बेबाकी से पूछा , " अनु, हम फिर मिलेंगे न ,
अनु ने अपनी वही मीठी मुस्कराहट देते हुए कहा , " हाँ , हम जरूर मिलेंगे।

और फिर एक बार मैं अपना घर छोड़ किसी और  घर चल पड़ा जहाँ मैं रहता था।

आज आँखें बहुत नम  थी मेरी , पर उसके फिर मिलने के वादे से मैं कुछ दिलासा लिए घर की ओर जाता रहा।

पर आज एक बहुत अंतहीन सा वक़्त हो चुका  है उसे देखे सुने पर जैसे लोग शादी में अग्नि को साक्षी मानकर जन्मो जन्मो का रिश्ता एक दूजे के साथ बाँध लेते है बस उसी तरह मैंने भी अनु को साक्षी मान  अपने आस पास हवाओं में,  अपनी साँसों में बसा लिया है , उसकी वो झीनी झीनी खुश्बू मैं आज भी हवाओं में महसूस करता हूँ।
हम उसके बाद कभी नहीं मिले ,  पर मैं आज भी उसकी  हम्म्म को हाँ समझ कर एक एहसास में जी रहा हूँ  ,  मैंने उसे अपने दिल और धड़कन से  कभी बाहर  ही नहीं आने दिया ।

सच तो ये है ये सांसें अब  सिर्फ तेरे नाम की
तेरा नाम लेकर न निकले
तो ये किस काम की।