रविवार, 27 सितंबर 2015

The Sweet September (chapter 1)

   

                                                          The Sweet September

                                                               (अध्याय - १ )


ये कहानी है राहुल शर्मा की, लोगो की ज़िन्दगियों पर रोमांचक कहानी लिखने वाले उस राहुल शर्मा की अपनी भी एक छोटी मीठी सी कहानी थी.

मैं राहुल शर्मा उम्र  25 साल और इन 25 सालो में कई महीने, दिन, सवेरे, अँधेरे, तेज़ किंरणे, हलकी बूँदें, कड़ाके की सर्दी, आग सी गर्मी और  कई दुखो  और मुठी भर आधी अधूरी खुशियों में इस  ज़िन्दगी में कई सही और गलत काम करते हुए आज भी वैसे ही अपने  मन की मुरादों को मुर्दा कर जी रहा हुँ.

पर ये कहानी मेरे उस 25 साल के जीवन पर नहीं बस उन बरसो में बूँद की तरह बरसे एक महीने की है. जब नार्थ इंडिया में बारिश की बूँदें हलकी साफ़ और खूबसूरत हो जाती है. इन 25 सालो में सितम्बर का महीना 25 बार मेरी जिंदगी में युही  बिना कुछ कहे सुने आकर चला गया.

1 सितम्बर 2014  नौकरी छोड़ देने के 3 साल  बाद दोबारा मेरी नयी  जॉब पर ट्रेनिंग का पहला दिन, मैं अपनी नीली बाइक पर नीली शर्ट और काली पैंट पहन सुबह 7 बजे से घर से अपना वाइल्ड क्राफ्ट का ब्लैक बैग लेकर घर से निकल रस्ते भर सोचता रहा न जाने ये ट्रेनिंग क्लास कैसी होगी , क्या मैं फिर से जॉब कर पाउँगा, कहीं कोई गलत फैसला तो नहीं ले बैठा मैं. फिर सोचा जहाँ इतने  दौर  देखे है सही और गलत फैसलों के एक और सही  क्या पता अब यही होना था. युहीं इधर उधर की बात सोचता सोचता मैं अपनी मंज़िल नहीं पर शायद मंज़िल के करीब ट्रेनिंग टाइम से 15 मिनट पहले पहुंच वहां की रिसेप्शन के बाहर बैठ गया. धीरे धीरे एक एक कर कुछ 20  लोग जो सब लगभग सब मेरी उम्र के  ही थे. ये देख लगा अभी भी काफी उम्र है नौकरी करने की।
15  मिनट हो चुके थे मैं सब के साथ ट्रेनिंग क्लास में पहली रो  की तीसरी  कुर्सी पर जाकर बैठ गया.

किसी को कहते हुए सुना था इस training  batch  में 25 student है. पर अभी तक सिर्फ 24  ही आये थे. देखते देखते trainer भी आ गया. अचानक सब जोर से बोल पड़े good  morning  sir. मैंने आगे सर किया और सब के चुप होने पर कहा good morning sir.

उन्होंने भी अपनी चेक की शर्ट पर मेहरून रंग की बंधी टाई को सही करते हुए हल्का सा मुस्कुरा कर कहा GOOD MORNING bankers.

class का पहला दिन स्टार्ट करने से पहले उन्होंने सब को अपना इंट्रोडक्शन देने को कहा. और सब के इंट्रोडक्शन से पहले अपना नाम बताया और कहा मैं हूँ कमलनाथ अरोरा रिटायर्ड बैंकर from SBI bank और अब आप जैसे नए bankers को training देता हूँ और उम्र समझो की अब मुझे fixed deposit पर 0.5 percent intrest ज्यादा मिलता है. मैं सोच ही रहा था इस बात का मतलब तभी किसी ने बड़े प्यार से कहा may  i come in sir …जैसे ही मैंने प्यारी जिसके बोलने में हलकी सी मुस्कराहट भी सुनती थी अव्वाज़ सुनी तो देखा की क्लास के entrance पर वो 25th  student अपने कंधो पर छोटे से बैग का हल्का सा भोज लिए माथे पर गिरती बालो की एक लट  को बार बार अपने कानों के पीछे रखती पीले रंग के सूट में आँखों बीच एक छोटी पीली बिंदी लगाये हमारे ट्रेनर कमलनाथ अरोरा से आने की permission मांग रही थी.

कमलनाथ sir भी बड़े प्यार से बोले आप लेट क्यों हो गए और उसके जवाब  से पहले बोले आ जाइये पर आप आज के बाद लेट नहीं होंगे।


 मेरी नज़रें उसे बिना ये सोचे  की कोई देख लेगा उसे  देखती रही जब तक वो 5th  row में अपने उस हलके बैग के वजन को अपनी सीट पर रख बैठी नही.

तभी अचानक कमलनाथ सर ने फर्स्ट row  में बैठे पहले स्टूडेंट को सामने आकर अपना इंट्रोडक्शन देने को कहा।
hello everyone i am amit from haryana and i am  MBA from kurukshetra university बाद में जो मेरा अछा दोस्त बन गया. मेरा नंबर 3rd ही था. उस दिन मैं खुद के बारें में बताने से ज्यादा उसके बारें में जानना चाहता था. good  morning everyone i am rahul sharma from delhi i am MBA from delhi university i am a part time writer and musician. और बस ये कह कर मैं अपनी पहली रो की तीसरी सीट पर जाकर बैठ गया।  धीरे धीरे बाकि २२ trainee  और अपने  बारें में बता कर चले गए पर मुझे तो उस 25th trainee का इंतज़ार था जैसे ये इंतज़ार शायद मुझे  25 साल से था.

वो अद्भुत थी जैसे उसके जैसा कोई और कहीं भी नहीं .मैं उसके बारे  में जानने के लिए तरस सा रहा था . मेरे सोचते ही सोचते वो पीछे अपनी  सीट से उठ मेरे सामने आ खडी हुई जहाँ मैं उसे बहुत करीब से देख सकता था. 

Good morning everyone I am anushka kashyap from pathankot और मैंने अपनी  MBA DAV college से की है और आज बहुत ख़ुशी है की मैं एक बहुत बड़े PVT  बैंक की ट्रेनिंग में आप सब के बीच यहाँ हूँ.

बस इतना कह कर वो चली गयी. पर मैं उसे और सुनना चाहता था , ज़िन्दगी भर सुनना चाहता था. उसके परेशान से बालो को सुलझाना चाहता था।  उसकी छोटी गोल आँखों  से खुद को देखना चाहता था और उसके गुलाब की पत्ती जैसे छोटे छोटे होंठ जो हर वक़्त धीमी मंद हवाओं से मुस्कुराते उन हवाओं में सांस लेना चाहता था. 

उसके बारें में थोड़ा बहुत जान चुका था मैं पर मैं शायद और जानना  था।  मेरा उस ट्रेनिंग में कोई ख़ास लगाव  नहीं था बैंकिंग मुझे थोड़ी बहुत आती थी पर अब शायद ट्रेनिंग में आने का मुझे एक खूबसूरत कारण  मिल गया था. मैं रोज़ सुबह सबसे पहले आता और मेरी आँखें छुप छुप कर उसे  देखती औए शाम को ट्रेनिंग के बाद मैं अक्सर उसके चले जाने के बाद ही जाता था।  पर इतना काफी नहीं था मैं उससे बात करना चाहता था कुछ उसके बारें में जानना और कुछ अपने बारें में बताना चाहता  था और रोज़ यही सोचता था की कहीं ये एक महीना  यूँ ही न गुज़र जाये। 

एक हफ्ता गुज़र चूका था उसे रोज़ यूँ छुप छुप कर देखते हुए फिर एक दिन हमारे कमलनाथ SIR ने हमें एक छोटी सी ASSIGNMENT दी और एक TEAM बनायीं और आज खुसी की बात ये थी की मेरी टीम में 4 लोगो में से एक वो भी थी जिसे मैं रोज़ चुपचाप अपनी आँखों को सब से छुपाकर उसे छुप छुप कर देखा करता था। 

हम एक साथ GROUP में बैठ गए. मुझे आज किसी  शर्म नहीं थी बस फ़िक्र थी की आज के बाद न जाने उसे जानने का मौका कब मिले। ASSIGNMENT कुछ आधे घंटे की थी तो वक़्त कम था मेरे पास ASSIGNMENT के लिए नहीं बल्कि उसे जानने उसे बातें करने और उसे अपने करीब रखने के लिये। आज वो मेरे सामने बहुत करीब थी उसके बाल आज भी परेशान थे और छोटी छोटी आँखें चुप चाप बैठी इधर उधर देख कुछ कहने की फ़िराक में थी।  ASSIGNMENT कुछ 15 मिनट में खत्म कर मैंने बड़ी हिम्मत कर और बेबाकी से पहली बार कुछ कहा और पूछा . 

तुम कुछ कहना चाहती हो तो कह सकती हो।

बस मेरे कहने की देर थी और वो फटाक से बोली जैसे वो सोच ही रही थी की कोई मुझसे मेरी इन परेशान बेचैन आँखों का  कारन पूछे।
उसने थोड़ा करीब आकर मेरी आँखों में आँखें डाल  पूछा, ये BANKING INDUSTRY सही तो हैं ना
उसने हल्का सा करीब आकर मेरी आँखों में आँखें डाल  अपनी सारी बेचैनी जैसे मुझे देदी थी।
मैं उसके चेहरे को अपने हाथो में लेकर उसे माथे से चूमकर गले लगाकर ये कहना चाहता था की नहीं बैंकिंग मे अच्छा करियर है और तुम डरो मत मैं हूँ ना  पर मैं जैसे अपने हाथो को बांधे बैठा था और मैंने कुछ देर सोच कर थोड़ा उसके करीब जाकर बोल दिया, कि नौकरी सभी ऐसी होती है.

उसने सांस में सांस भर थोड़ा पीछे होकर और मुझे अपनी गुलाब की पतियों जैसे होंटो से मुस्कुरा कर THANK YOU बोला। लगा जैसे मेरे पास मंद मंद हवाएं चल पड़ी हो एक सुगंध सी फ़ैल गयी हो मुझे इतनी ख़ुशी इन 25  सालो में कभी नहीं मिली जो आज उस 25TH TRAINEE के एक THANK  YOU  से मिली।

आज के लिए इतना काफी था रात को उसके बारें में सोच उसके सपने लेकर सोने के लिए और सपने भी पूरी ज़िन्दगी उसके साथ बिताने के होते थे।  

 धीरे धीरे महीना गुज़र  रहा था और हर रोज़ ऐसे छोटे मोटे ASSIGNMENTS में अक्सर बातें  करते रहते  थे। 
एक दिन CLASS में ट्रेनर एक घंटा लेट आये और हम 4 लोग साथ बैठे थे।   जहाँ बातें करते करते अनु अपने बारें में बता रही थी और मैं उसकी एक एक बात बड़ी गहरायी से सुन रहा था वो अपनी पिछली ज़िन्दगी  कुछ बातें बयान कर रही थी। 
कुछ 15 मिनट उसकी बातें सुनने के बाद एक जगह बिना उसकी इज़ाज़त के अपनी मुंडी को हल्का सा पीछे की और घुमाकर उसे टोकते हुआ कहा 
अगर मैं गलत नहीं हूँ तो तुम्हारा NO . 3 है. 

कुछ देर चुप रहने के बाद उसने कहा , मतलब 

मैंने कहा , मेरा मतलब तुम्हारी DATE OF BIRTH

वो फिर कुछ पल के लिए चुप हो गयी और मैं दुआ कर रहा था की मैं यहाँ गलत नहीं हो सकता 
और कुछ देर बाद उसने बड़ी बेबाकी से अपनी गर्दन को हल्का सा हिलाकर कहा , "हाँ 3 ही है। 
ये सुनकर मैं फिर आगे की और होकर बैठ गया और उसकी बात फिर से ध्यान से सुनने लगा। 

कुछ देर और उसकी बातें सुनने के बाद मैंने फिर से अपनी गर्दन हलकी सी पीछे घुमायी और फिर उसकी इज़ाज़त के बिना उससे पूछने ही वाला था की उसने मेरी और देखते हुए कहा , " अब क्या 

मैंने कहा, " अगर मैं गलत नहीं हूँ तो तुम्हारी  DATE OF BIRTH 30-DEC है।  
बस इतना कहते ही वो मेरी तरफ अचंभित होकर देखने लगी मैं कुछ पल के लिए खुद भी हैरान सा हो गया ये जानकर की मैं फिर से  सही था। 

मुझे हैरान नज़रो से देखते हुए उसने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा , " क्या तुम मुझे जानते हो 

मैंने कहा , " नहीं मैं तुम्हे जानता तो नहीं ,  पर  मैं  खुद से मन ही मन  ये भी कह रहा था शायद मैं तुम्हे जानता।   
और कहीं ये एहसास भी था की कुछ तो होगा हमारे बीच जो मुझे युहीं उसकी बातों से उसकी DOB का पता चला 
 उस  शाम तक मुझसे कई बार पूछती रही, " कि बताओ न तुम्हे कैसे पता 

और मैं खुद को जादूगर की तरह दर्शाता रहा पर सच तो ये है मैं आज तक भी नहीं जानता  की मुझे कैसे पता होता था उसकी हर पसंद और नापसंद का 

शाम को घर जाते हुए मुझे एक बार फिर उससे बात करने का मन हुआ तो मैंने थोड़ी सी हिम्मत कर  बोला 

HEY ANUSHKA

मेरा इतना कहने पर वो झट से पीछे की और मुड़ गयी और उसने बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए कहा , " हाँ बोलो 
मैं कुछ देर उसकी मुस्कुराती आँखों को देखता रहा और फिर पूछने के लिए कुछ नहीं सुझा तो बस ये पूछ बैठा 

तुम्हे सब घर में प्यार से क्या बुलाते है और सोचने लगा कहीं गुस्से में ये न कहदे , "  तुम्हे क्या , तुम क्या
करना चाहते हो जानकर
पर ऐसा कुछ नहीं हुआ , उसने बड़े प्यार से फिर से मुस्कुराते हुए अपने नाम को ही थोड़ा छोटा करते हुए कहा , "
घर  में सब मुझे प्यार से अनु   बुलाते है।  

ये कहकर हमने एक दूसरे को BYE और अपने अपने घर  की  और चल पड़े पर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उससे दूर उसे छोड़कर जा रहा था।  जिसे मैं भी प्यार से अनु बुलाना चाहता था।