kumar
शनिवार, 13 फ़रवरी 2016
JAAG
जाग
तू मुझ में जाग है रही
मैं तुझ में यूँ सोया हूँ
तू मुझ में हस्ती है आज भी कहीं
मैं तेरे सारे आंसू यूँ रोया हूँ
जो हो रहा है ये
इस बात का नहीं गम
नींद होगी तेरी भी कुछ इस तरह
न जाने क्यों ले बैठा हूँ मैं ये भर्म
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