मैं और मेरी कॉफ़ी
love beans
तनहा सा रहता था मैं इस तनहा शहर में, कभी खुद से छिपता , कभी खुद से मिलता था
अक्सर देर से सोता था , देर से उठता था।
न जाने कितने बरस हो गए थे मुझसे आलसी को सुबह सवेरे की दुनिया देखे सुने
आज बैठा हूँ हाथ में कॉफ़ी का मग लिए , जैसे न जाने कितने बरस से हुए खुद के साथ इतने
इतमिनान के साथ बैठे हुए
कुछ पुरानी बचकानी बातों को याद करता
कभी किसी बात पर खुद ही हंस पड़ता
तो कभी आँखें नाम हो जाती
आज भी वो कैंटीन की शरारते, class में एक दूसरे से शरमाने वाले
दिन याद आते है
facebook नहीं था तब
facebook का मतलब बस face के सामने book का होना होता था
कोई gmail - cmail भी नहीं थी
हाँ ख्वाबो की एक female थी
जिसे पास की stationary से छोटी सी diary खरीदकर
अपनी कवितायेँ लिखकर देता था
वो मेरी कविताओं के उन उलझे शब्दों में खो जाती थी
और मैं भी उसकी आँखों को देर तक देखता रहता था
वो देर तक पढ़ती
और अच्छा लिखते हो कहकर चली जाती
और मैं हाथ में कॉफ़ी का मग पकडे
उसे देर तक दूर तक देखता रहता। .......
Coffee Dream
कई बार january की कड़ाके की सर्दी में , अपने नरम हाथो से कॉफ़ी पकड़ाती
तो उसकी नरम मुलायम उंगलिया हाथो को छू जाती थी
और फिर महीनो सपने आते थे
वो काली मिर्च , अदरक वाली चाय तो जैसे अब भाती नहीं थी
और कॉफी,,,,,,,मानो मैं आशिक़ सा हो गया था
कभी दफ्तर की सुबह की कॉफ़ी
कभी शाम कोई गपशप में कॉफ़ी
तो कभी ऊँची ईमारत पर घर की खिड़की वाली कॉफ़ी
मेरा एक दोस्त है chintoo
जो अक्सर कहता था की
ज्यादा कॉफ़ी अच्छी नहीं होती
और यहाँ ये हाल था की एक रात एक हसीं सा ख्वाब आया
या फिर यूँ कहो कि एक अजीब ओ हसीन ख्याल आया
ख्वाब में मैं उसके पास उसकी हाथो की छोटी छोटी उँगलियों को अपने हाथो में लिए
एक coffee cafe में बैठा था
जहाँ मैं हमेशा की तरह अपनी हलकी काली हलकी कड़वी कॉफ़ी पी रहा था
और वो ठंडी मीठी cold coffee पी रही थी
मैं उस काली कड़वी कॉफ़ी को एक मीठे रस की तरह पी रहा था
और मेरी आँखें छुप छुप कर उसे कॉफ़ी पीते देख रही थी
तभी अचानक मेरी नज़र दूर बैठे एक वेटर पर पड़ी
जो बड़ी देर से उसे देख रहा था
कहना शायद अच्छा नहीं लगता
पर शायद अपनी आँखें सेक रहा था
वो डरी सहमी सी बैठी थी
मैं गुस्से में अपना आपा सा खो बैठा था
तभी मैंने वेटर को अपने पास बुलाया
और उस काली कड़वी कॉफ़ी को उसको एक झटके में पिलाया
और तभी सुबह खिड़की से वाली सूरज की एक किरण ने मेरी आँखों को खोल जगा दिया
तो आगे क्या हुआ कभी जान ही नहीं पाया
अब सोमवार का दिन, न कोई त्यौहार था और न कोई बैंक holiday
दफ्तर जल्दी जाना था , तो दोबारा सोकर आगे क्या हुआ कभी जान ही नहीं पाया
तो सपने को वहीँ छोड़ अपनी कॉफ़ी पी दफ्तर के लिए निकल गया
हाँ रास्ते में chintoo याद आया
मेरा दोस्त , जो अक्सर कहता कि कॉफ़ी अच्छी नहीं होती
Empty Mug
कल बड़े दिनों के बाद उसे एक common friend की शादी में देखा , वो काली चमकीली साड़ी, माथे पर छोटी सी बिंदी, होठों पर हलकी सी लाली और बाल पहले से छोटे थे पर अच्छे लग रहे थे।
मैं दूर एक table पर बैठा coffee पी रहा था
और वो अपने चार दोस्तों के साथ खड़ी हंस रही थी
मुस्कुरा रही थी , और मेरी आँखें फिर से एक बार उसे छुप छुप कर देख रही थी
देखते देखते मुझे वो दिन याद आया जब शाम को कॉफ़ी देते हुए उसने मेरे कपड़ो पर गिरा दी थी , और मैं गुस्से में उसे डांटने लगा था और वो नाराज़ होकर चली गयी थी। और अगले दिन वो अपनी family के साथ mumbai जाने वाली थी
मैं अगली सुबह उसके घर माफ़ी मांगने भी गया था , पर वो जा चुकी थी
सोच रहा था कहीं वो आज भी नाराज़ तो नहीं, क्या वो मुझसे बातें करेगी, तभी अचानक उसने मेरी और देखा और मैं बस एक छोटे बच्चे की तरह सिर छुपाकर कॉफ़ी पीने लगा और सोचने लगा क्या उसने देखा मुझे
तभी अचानक किसी ने मुझे HI! कहा, मैंने अपना सिर कुछ ऊपर किया तो देखा वो जो सपनो में थी आज मेरे सामने हक़ीक़त बनी खड़ी थी।
मैं उसे देख उसकी यादों खो सा गया था और मेरे कोई जवाब न देने पर उसने फिर से मुझे HI! कहा , मैं कुछ चौंका और खुद को यादों से बाहर निकाल, उसकी और देख मैंने भी उसे HI! कहा
उसने पूछा , how are you, Rahul
मैंने कहा , " I am fine , तुम कैसी हो
उसने मेरी और देख कहा , " मैं अच्छी हूँ
मैंने भी मुस्कुराते हुए उसे देखते हुए कहा , " हाँ , तुम आज भी बहुत अच्छी हो
उसने पूछा मुंबई कब आये
मुंबई आये मुझे कुछ एक साल हो चूका था
पर मैं शायद उसे फिर से नाराज़ नहीं करना चाहता था
इसलिए बस कुछ हफ्तों पहले आया हूँ कह दिया
मैंने उसे अपने पास बैठने के लिए कहा और पूछा , " कॉफ़ी पियोगी
उसने कहा , " अगर तुम्हारे कपड़ो पर गिरी तो डाँटोगे तो नहीं
मैंने बताया की मैं अगले दिन तुम्हे sorry कहने आया था
उसने हसकर कहा, " कोई नहीं तब नहीं कह पाए , तो अब कह दो
उसके बाद हम देर तक बातें करते रहे
रात काफी हो चुकी थी
उसके छोटे काले बालों की तरह
हल्के बादल भी छाए थे
उसके सभी दोस्त जा चुके थे , उसने मुझे खुद को घर drop करने के लिए बोला और हम अपने जूतों को हाथो में लिए नंगे पाओं समुद्र के किनारे ठंडी रेत पर चलते रहे
हलकी धीमी हवा में बारिश की बूँदें फव्वारे की तरह चेहरे पर पड़ रही थी, उसकी साड़ी हवा में लहर कर बार बार मेरी उंगलियों को छू रही थी, वो रात मेरे लिए एक सपने जैसे थी
चलते चलते कब उसका घर आ गया पता ही नहीं चला
उसने मुझे अंदर आकर कॉफ़ी पीने के लिए कहा पर रात काफी हो चुकी थी , और सुबह office जल्दी जाना था
इसलिए फिर कभी कहकर , मैं फिर उन तनहा गलियों के उस तनहा से घर की और चल पड़ा , जहाँ मैं रहता था।
उस रात मन में अजीब सी ख़ुशी थी, मैं उस सिमटी हुयी चादर पर देर तक आँखें खोले लेटा रहा, सोच सोच कर मुस्कुराता भी रहा और फिर पता नहीं कब मेरी आँखें बंद हुयी और मैं सो गया
अब हम अक्सर मिलते थे , कभी ऑफिस के पास वाले कैफ़े में , कभी जुहू की चौपाटी पर घंटो बातें करते थे
अब मैं उसे वो अपनी collage वाली poem नहीं सुनाता था , पर बातों ही बातों में उसे चाहता हूँ ये कई बार कह जाता था
एक दिन देर रात उसका फ़ोन आया और कहने लगी की सुबह पापा ने कॉफ़ी पर बुलाया है
बस ये कहकर फ़ोन काट दिया और मैं उसके बाद देर तक सोचता रहा
सुबह आँखें जल्दी खुल गयी थी , और आज मैं घर से कॉफ़ी पीकर नहीं निकला , उसका घर कुछ आधे घंटे की दूरी पर था तो मैं पैदल ही निकल गया
मैंने घर के बाहर लगी एक jingle bell सी दिखने वाली bell को हलके से बजाया
कुछ देर तक कोई नहीं आया मैं फिर से बजाने वाला था कि तभी "कौन है" की आवाज़ आई
मेरे कुछ कहने से पहले दरवाजा खुल गया, दरवाजे पर आंटी खड़े थे , मैंने aunty को good morning कहा
aunty ने अंदर आने को कहा और डाटना शुरू कर दिया , कहने लगी इतने दिन हुए कभी मिलने क्यों नहीं आये
तभी uncle भी आ गए और उन्होंने मुझे balcony में पड़ी chair पर बैठने के किये बाहर बुलाया और aunty को कॉफ़ी बनाने के लिए कहा
अंकल मेरे साथ बैठकर कई नयी पुरानी बातें करने लगे, मैं uncle की बातों से बोर होने लगा था
कुछ देर बाद सीढ़ियों से नंगे पांव भागती हुयी वो भी आ गयी
कुछ देर बाद aunty सबके लिए कॉफ़ी लेकर आ गयी
कॉफ़ी पीते - पीते uncle ने मुझसे उसकी शादी की बात की
और कहने लगे कि तुम्हारी नज़र में कोई अच्छा लड़का हो तो बताना , सपना की शादी के लिए
हाँ , सपना जो पिछले कई सालो से अब तक मेरे लिए भी सपना ही है , जिसे मैं साफ़ सीधे तौर पर कभी बता नहीं पाया , कि उस सपना को मैं अपने सपनो से निकल हक़ीक़त में पाना चाहता था
पर मुझे अक्सर लगता था कि मैं इतना बुरा तो नहीं हूँ, पर शायद uncle को एक अच्छा लड़का चहिये था।
उस दिन मैं वो काली कड़वी कॉफ़ी पी नहीं पा रहा था
उस रात एक अजीब सा एहसास हो रहा था जैसे खिलखिलाती धुप पर अचानक बदल छा गए हो , बूँदें भी गिरने लगी थी और मैं खुद को एक बेशाख से पेड़ के नीचे छुपाए बैठा हूँ
मैं रात भर सोच ही रहा था तभी सुबह के लगभग 5 :00 बजे मेरे फ़ोन की घंटी बजने लगी
मैंने खुद को सोच से जगाया और देखा , सपना का फ़ोन था।
सपना ने धीमी सी आवाज़ में कहा , " आज शाम को मिल सकते हो, कुछ जरुरी बात करनी है।
मैंने कहा , " हाँ , जरूर , क्या हुआ तुम ठीक हो
उसने कहा , " हाँ मैं ठीक हूँ , बाकि मिलकर बताती हूँ
और ये कह , सपना ने फ़ोन काट दिया
मैं शाम को अपने office के पास वाले cafe में उसका इंतज़ार करने लगा और मेरे दिल की धड़कन रेल के इंजन की तरह बड़ी ज़ोर से धड़क रही थी। मेरे पैर भी काँप रहे थे। शायद मैं काफी घबराया हुआ था , रह रह कर अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे।
कुछ देर इंतज़ार करने के बाद सपना भी आ गयी , मैं कॉफ़ी order कर चूका था।
वो आकर मेरे सामने कुछ देर चुप बैठी रही , और मैं उसकी आँखों को छुप छुप कर देख पढ़ने की कोशिश कर रहा था
वो कुछ कहना चाहती थी , पर मैं पूछ नहीं पा रहा था
और आज उसकी आँखें भी चुप थी , तो मैं कुछ समझ नहीं प रहा था।
इससे पहले मैं अपनी कॉफ़ी खत्म करता ,उसने मुझे उठने के लिया कहा , और कहने लगी मेरे साथ मेरे ऑफिस चलो।
और मुझे संग खींच अपने office ले गयी
उस दिन न मैं उसकी आँखों को सुन प रहा था और न उसके हाथो के हलके से स्पर्श को महसूस कर पा रहा था
आज मैं उसकी चुपी में उलझ सा गया था
उसने मुझे ऑफिस के waiting room में wait करने के लिए कहा
मैं वहां बैठा कॉफ़ी हुए उसका इंतज़ार करने लगा और मैं इस इंतज़ार पहेली में फंसता जा रहा था।
कुछ देर बाद वो waiting room में अपने एक दोस्त के साथ आई।
अब शायद पहेली सुलझने वाली थी
ये इंतज़ार खत्म होने वाला था
और मेरी कॉफ़ी भी
उसने मुझे अपने उस दोस्त से मिलवाया और कहा , राघव , ये अच्छा लड़का है
वो तेज़ धड़कती धड़कने बस रुकने ही वाली थी की तभी कॉफ़ी की उस आखरी sip पी कर।, मैंने फिर एक बार खुद को समझाया।
कुछ महीनो बाद उनकी शादी
शादी में मैं भी गया था
पर सपना अभी भी एक खूबसूरत सपना है
याद है
और कॉफ़ी मैं आज भी पीता हूँ
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