रविवार, 17 फ़रवरी 2013

Main yaheen hoon...



Main yaheen hoon.....

मैं यहीं हूँ  तुम्हारे साथ तुम्हारे पास 
मेरे जाने का गम न करना 

जो भी रिश्ता था हमारा 

उनकी यादों को कम न करना 
हंस देना कभी 
उस शरारत को याद कर 
मुस्कुरा देना कभी 
वो पहली बार तुम्हे कहने और न कहने की घबराहट पर 
कभी अगर आँखें नम  हो 
तो ख़ामोशी  में दफ़न कर मुझे याद करना 

मैं यहीं हूँ तुम्हारे साथ तुम्हारे पास 

मेरे जाने का गम न करना 

कभी अपनी आँखों को बंद कर 

बाहों को खुले आसमान में फैलाये 
अपनी हाथों की  छोटी नरम उँगलियों से 
मुझे हवाओं में महसूस करना 
मैं यहीं हूँ तुम्हारे साथ तुम्हारे पास 
मेरे जाने का गम न करना 
मेरे जाने का गम न करना 



FIST OF MY DREAM



Mere Sapno ki Muthi (Fist Of My Dream)

सपने देखे थे जो कुछ आपने
थमा दिए कुछ मेरे हाथ में

सपने थे जो मेरे
बंद मुठी से घिरे

आज भी कभी कभी
छुप छुप  कर देखता हूँ मैं उन्हें

मेरी हाथों की उँगलियों में जागते
लिखते, हँसते,उदास  होते
तो कभी गहरी नींद में सोते

मेरे  हाथों को प्यार से सहलाते, गुदगुदाते हैं आज भी

सपने थे जो मेरे
बंद मुठी से घिरे

 ये सपने आपसे अनजान थे
आप भी कहाँ इन्हें थे पहचानते

एक बार मेरे साथ मेरे सपनो में जो जागते
तो जान जाते

क्या थे सपने मेरे
बंद मुठी से घिरे ....