शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

JAAG




                                                                     जाग 





 तू मुझ में जाग है रही
मैं तुझ में यूँ सोया हूँ
तू मुझ  में हस्ती है आज भी कहीं
मैं  तेरे सारे आंसू यूँ रोया हूँ
जो हो रहा है ये
इस बात का नहीं गम
नींद होगी तेरी भी कुछ इस तरह
न जाने क्यों ले बैठा हूँ मैं ये भर्म





रविवार, 7 फ़रवरी 2016

Sweet September (Chapter 2)

                                                    SWEET SEPTEMBER ( अध्याय २ ) 


एक दिन शाम को  सबके चले जाने के बाद मैंने अनु को रिक्शा स्टैंड पर काफी देर तक रिक्शा का इंतज़ार करते देखा , मैं उसके पास जाकर उसे उसके घर तक छोड़ने के लिए पूछना चाहता था , पर पहले तो हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी पर फिर अनु को यूँ इंतज़ार कर मैं बिना सोचे समझे अपनी बाइक अनु के सामने जा खड़ी कर, उसे बैठने के लिए बोला 

अनु ने कहा।, " नहीं , थोड़ी देर में रिक्शा आ जाएगी, इससे पहले अनु कुछ और कहती 
मैंने कहा, " बैठ जाओ , वैसे भी 15 मिनट से तो कोई रिक्शा आई नहीं।  

उसके बाद अनु बिना कुछ कहे , मेरी नीली बाइक पर बैठ गयी , और मुझे सब कुछ बस एक सपना सा लग रहा था , पर मैं खुश था।  
अनु PG में रहती थी , पर वहां जाने का रास्ता वो खुद भी नहीं जानती थी,  उस दिन हम उस 15 मिनट के रास्ते में लगभग 1 घंटा इधर उधर घूमते और बातें करते रहे।  
उस दिन उसे उसकी PG वाली गली के बाहर ड्राप कर , मैंने अनु से कहा , "तुम इस अनजान शहर में  अपने PG का रास्ता जाने बिना एक रिक्शा वाले पर भरोसा कर चली आती हो 

अनु ने हस्ते हुए मुस्कुराते हुए कहा , " अच्छा तो फिर किस पर करू 
मैंने भी हक़ से कह दिया, " चलो आज के बाद तुम्हे तुम्हारी PG वाली गली से पिक करने और शाम को ड्राप करने की ज़िम्मेदारी मेरी 

अनु ने कहा , " पर, तुम्हे दूर पड़ेगा 
उसकी ये बात सुन मैं मन ही मन सोचने लगा , अगर तुम पास हो तो फिर शायद कुछ भी  दूर नहीं। 

पर मन की बात मन में रख मैंने कह दिया , " मैं नहीं जानता कल सुबह 7 बजे मैं तुम्हारा यहीं इंतज़ार करूँगा 

अब हम अच्छे दोस्त बन गए थे , मैं रोज़ सुबह ठीक 7 बजे उसकी PG वाली गली के बाहर उसका इंतज़ार करता और वो हमेशा वक़्त से 5 मिनट लेट आती, अब वो मेरे पास वाली 2nd वाली सीट पर मेरे साथ बैठती थी और हम दिन भर खूब बातें करते थे इतना ही नहीं  मैं रोज़ सुबह उसे उसके PG वाली गली के बाहर से pick करने के बाद हम सुबह सुबह ट्रेनिंग सेंटर के पास वाले CCD जाते जहाँ वो अपनी मनपसंद choco brownie खाती और मैं कभी कभी कॉफ़ी पी लेता था। वैसे इतनी सुबह कोई CCD नहीं खुलता पर लगता है जैसे ये CCD सिर्फ उसके लिए  खुलता था, जहाँ वो अपनी मनपसंद मीठी choco brownie खा सके।  कई बार choco brownie खाते हुए उसके बालो की एक लट उसके चेहरे पर गिरती और खिड़की से आती हलकी हलकी हवा में उसे सहलाती और अनु के हाथ चॉकलेट से भरे होने के कारण वो उस एक लट को बार बार पीछे न कर पाती , और मैं अक्सर सोचता की मैं उस लट को  अपने हाथो से उसके झुमके से सजे कान के पीछे कर उस लट से कह सकू  की अब तुझे बार बार आगे आ उसकी खूबसूरती को सहलाने की जरुरत नहीं , " मैं हूँ न " 

शाम को अनु को उसकी pg वाली के बाहर DROP करते हुए हम अक्सर रास्ता भूल जाते थे, और घंटो कभी सही और  कभी किसी गलत मोड़ पर घूमते रहते पर उसके साथ सफर कितना भी लम्बा हो हमेशा छोटा ही लगता था। उसको उसकी pg वाली गली के बाहर ड्राप कर हम वहां  खड़े होकर घंटो गप शप करते और अक्सर BYE कहकर गली की और जाते हुए अपने हलके से BAG का भारी बोझ लिए पीछे मुड़ती और फिर मुझे देख मुस्कुरा अपने छोटी छोटी उंगलियो वाले हाथो को हिला फिर BYE  कहती , और मैं भी उसका हर रोज़ तब तक इंतज़ार करता जब तक वो एक बार पीछे मूड , मुस्कुरा BYE न कहती।

यूही एक एक कर ट्रेनिंग के दिन कम हो रहे थे और मौसम में सर्द बढ़ रही थीं और मौसम में बदलाव क्या आया एक दिन अनु को झुखाम हो गया , उसे कभी गुस्सा नहीं आता था शायद जिस नाक पर गुस्सा होता है वहां तो हमेशा झुखाम ही होता था और मैं जो रोज़ सुबह अपने लिए LUNCHBOX  भी नहीं ले जाता था मैं राहुल शर्मा रोज़ उसके लिए अदरक वाली "GREEN Tea " बनाकर ले जाता था , आपको लगता होगा आखिर क्या हुआ था मुझे जो मुझे उसकी हर हंसी-ख़ुशी, दिन -रात , उसकी तारीफ़ , उसकी परवाह सब मीठी मीठी लगने लगी थी। 
हाँ , मुझे अनु से प्यार हो गया था , मैं हर पल , हर लम्हा , हर दिन , हर रात , हर दुःख , हर सुख बस उससे और उसके चाहता था। पर यहाँ  मैं इतना कुछ तय कर चूका था पर वो क्या सोचती इस बारें में सोचा ही नहीं था , और इधर  ट्रेनिंग के दिन धीरे धीरे धीरे खत्म हो रहे थे , पर अपने बारें में बताने से पहले मैं उसके बारें में जानना चाहता था।  

और इसी तरह एक दिन उसे PG की और ड्राप करने जाते हुए , मैं उससे उसके BOYFRIEND के बारें में पूछने की सोचने लगा , और वैसे भी हम इतने अच्छे दोस्त बन  चुके थे की एक दूसरे से  कुछ भी पूछ सकते थे कह सकते थे ,  और उस दिन उसकी PG वाली गली  के बाहर उसे अलविदा कहने से पहले मैंने बड़ी बेबाकी से  अनु से पूछा , " अनु, क्या तुम्हारा BOYFRIEND है।  

इस बात पर अनु रुक गयी , और उसने थोड़ा आगे आ कहा , " हाँ , है  या शायद था , और फिर खुद को इस दुविधा से निकलने के लिए कहा , छोड़ो लम्बी कहानी है। 
उसकी इस हाँ और न के जवाब ने शायद मुझे एक बड़ी दुविधा में डाल दिया था।  
मैंने अपनी बाइक से KEY निकाल  और उतरकर उसकी और चेहरा कर बैठ , कहा , " मेरे पास तुम्हारे लिए काफी वक़्त है या शायद सिर्फ तुम्हारे लिए वक़्त है ,  ये शायद वाली बात मैंने मन ही मन में कही।  

मेरे कहने पर अनु ने कहा , " तुम सब जानते हो न , तुम्हे पता है मैं अब बिनाए बताये नहीं रहूंगी। 
मैंने कहा , "नहीं, मैं इतना तो नहीं जानता , पर हाँ मैं बिना जाने नहीं जाऊंगा, ये जानता हूँ।    

और फिर अनु ने सब बताया , की किस तरह उनमे प्यार हुआ और कैसे वो आज भी उसे वापस ले आना चाहती है।  पर ये कहानी उसकी है मेरी नहीं , तो यहाँ मैं राहुल शर्मा सिर्फ अपनी कहानी बताऊंगा।  

अनु कभी रोती  नहीं थी , पर आज मैंने उसकी उन हंसती हुयी आँखों में नमी देखी, जिसे वो अपने होठों की मीठी मुस्कराहट के पीछे छुपाये रहती थी।  और मैं शायद रोना चाहता था पर मैं रो भी नहीं सकता था , पर मेरा प्यार सिर्फ उसे पाना नहीं शायद उसकी ख़ुशी भी मेरा प्यार थी , और अगर उसकी ख़ुशी उसके प्यार को पाने में थी , तो मैंने  भी अभी अभी अपनी बंद  मुठी से निकले सपनो को फिर उन्ही मुठी दफ़न कर उसके करीब आ , हल्के से गले लगा , कह दियां: 

तुम्हारी आँखों की नमी देख सकता हूँ मैं 
तुम्हारी ज़िन्दगी की कमी देख सकता हूँ मैं 
तुम्हे अपनी उँगलियों से लिख सकता हूँ मैं 
अगर तुम भी कभी अपनी आँखों से नमी के परदे हटा कर देखो 
तो तुम्हे भी दिख सकता हूँ मैं।  

मुझे नहीं पता ये बात उसे कितनी समझ आई , और मैंने फिर अनु से कहा , " अगर तुम यही चाहती हो, तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ , तुम्हारे आस पास हूँ। 
और फिर अनु रोज़ की तरह मुस्कुरा कर मुझे अलविदा कह अपने PG की और चल पड़ी। और मैं उसे  उस दिन उसके दूसरी गली में मुड़ जाने तक देखता रहा।