रविवार, 10 जनवरी 2016

Sweet September (chapter 3)



                                                              Sweet September

                                                                  (अध्याय ३)


 मैं मन ही मन उसे उसकी चाहत से मिलाने का वादा कर तो आया  पर उस रात एक अजीब सी कश्मकश ने  मुझे सोने नहीं दिया, मैं पूरी रात कभी मुस्कुराता तो कभी उदास हो जाता, कभी उसके साथ बिताये लम्हों से मेरे चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती तो कभी उसके दूर चले जाने के डर से आँखें नम हो जाती। आखिर ट्रेनिंग भी खत्म होने को थी. मेरे पास सिर्फ 5 दिन थे.
अगले दिन ट्रेनिंग रूम में सब के चेहरों पर ट्रेनिंग खत्म होने की ख़ुशी थी वो भी खुश ही नज़र आ रही थी और मैं कुछ परेशान सा था
मैं जानता था  वो जो कभी मेरी न हो सकेगी मैं न जाने कभी का उसका हो चुका था।   वो मुझसे प्यार नहीं करती ये जनता था मैं पर  मैं उससे प्यार करता हूँ ये बात उसको बताना चाहता था और किसी कविता, कहानी या संगीत के जरिये नहीं बस उसके सामने  बैठ उसकी आँखों में आँखें डाल साफ़ साफ़ कह देना चाहता था ,
" अनुष्का मैं तुम्हे पसंद करता हूँ , हाँ मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ ,
पर सब जानते हुए  बात को उसके आगे बिछा देने की हिम्मत भी न थी

फिर एक दिन हम पास के एक मॉल में शाम को ट्रेनिंग के बाद मैं उसे एक नए cafe " chocolate Factory"  ले गया।  मुझे चॉकलेट पसंद नहीं तो मैं बस कॉफ़ी पी रहा था और वो कॉफ़ी के साथ अपनी मनपसंद चॉकलेट भी खा रही थी  लगता था जैसे उसके गुलाब से होठों पर चॉकलेट की परत चढ़ गयी हो।  होठों पर लिपटी उस चॉकलेट को देख  आज मैं भी चॉकलेट खाना चाहता था. मैं हमेशा की तरह आज भी मेरी आँखें उसे छुप छुप कर देखती रही,  उस दिन मैं काफी चुप थापर मेरी आँखें बहुत कुछ कह रही थी पर हमेशा की तरह वो मेरी आँखें पढ़ नहीं सकती थी, और उसे कुछ कह देने की मैं हिम्मत ही नहीं कर पा रहा  था.

राहुल चले, " मैं सोच ही रहा था तभी अनु ने चलने के लिए कहा
कहने लगी , " राहुल हम काफी लेट हो चुके है हमें चलना चहिये नहीं तो PG में entry नहीं मिलेगी और आज हम रास्ता नहीं भूलेंगे

 सच तो ये है मैं हमेशा से रास्ता जनता था बस उसके साथ अपना सफर लम्बा करना चाहता था पर आज हम लेट हो चुके थे और मैंने रास्ता बिना भूले उसे टाइम से पहले उसकी PG  वाली गली के बाहर drop किया और आज हमने हमेशा की तरह उसकी PG वाली गली के बाहर खड़े होकर बातें भी नहीं की बस जाते हुए आज उसने अपनी हलकी प्यारी सी मुस्कराहट के साथ कहा , " आज तुम काफी चुप थे पर तुम्हारी आँखें कुछ कहने की फ़िराक में थी , और मैं आँखों की बातें नहीं सुन सकती ये तुम जानते हो, तो अगर कोई बात है तो तुम मुझे बता सकते हो।
उसके ये कह देने पर मैंने उसके छोटे से चेहरे को अपने हाथो में ले उसे माथे से चूमकर कहा , " नहीं अनु मैं ठीक हूँ बस कभी कभी तुम्हारी फ़िक्र लगी रहती है

बस इतना कहते ही अनु ने अपने हाथो को आसमान की और उठा हवाओं में फैला कहने लगी, " मुझे क्या होगा देखो मैं आज कितनी खुश हूँ ,  और उसकी वो ख़ुशी वो हंसी देख जो मुझे भी मीठी मीठी सी ख़ुशी देती थी, मैं भी मुस्कुरा दिया और हलके से गले लगा कहा , जाओ अनु तुम लेट हो रही हो
और  फिर एक दूजे को अलविदा कह अपने अपने अपने घर की और चल पड़े।

अब ट्रेनिंग के बस 4  दिन रह गए थे और मैं उसे बिना अपने दिल की बात बताये जाना नहीं चाहता था।   और उस रात मैंने फिर से खुद एक बार समझा फैसला किया की अब मैं अपने प्यार का इज़हार कर के रहूँगा

ट्रेनिंग से  3 दिन पहले,  मैं उस दिन ट्रेनिंग के खत्म होने और शाम होने का इंतज़ार करता रहा पर मानों  जैसे उस दिन ट्रेनिंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी, हर पल हर लम्हा बहुत दुर्लभ और लम्बा हो रहा था और आख़िरकार एक लम्बे इंतज़ार के बाद शाम  हो गयी ,  खत्म होने के बाद मैंने अनु को कॉफ़ी के लिए पूछा ,  पर अनु ने कहा मुझे भूख लगी है
मैंने कहा ठीक चलो कुछ खाने चलते है
और हम पास में "Burger Girl"में  burger  खाने चल पड़े।

मैं आज भी चुप था सोच रहा था की कहू या नहीं , मैं कहने और न कहने की एक गहरी असमंजस में था मेरी सांसें रुक रुक कर आ रही थी , मेरे हाथ में एक पानी की बोतल थी जो मैं घबराहट में लगभग पूरी पी चूका था।  कुछ देर बाद हम "Burger Girl " पहुँच गए , मैं यहाँ पहले कभी नहीं आया था तो शायद आज सब कुछ नया सा ही होने वाला था मेरे साथ
 हम दोनों ही veg थे , उसने एक burger के साथ ice tea order की और मैंने भी।

उसने आज एक पीले रंग का सूट पहना था , और आज उसके बाल  रोज़ की तरह परेशान नहीं थे और उसके माथे के बीच छोटी सी बिंदी भी थी  , कुछ देर चुप चाप उसे देखने के बाद मैंने बड़ी बेबाकी से कहा, " अनु तुम बहुत खूबसूरत हो।
 इससे पहले वो कुछ कहती हमारा आर्डर आ चुका था.
burger खाते हुए हम कुछ ख़ास बातेंनहीं कर रहे थे ,  कुछ देर बाद कुछ bites और sip लेने के बाद
अनु ने धीमी सी आवाज़ में मुझसे कहा , " राहुल मुझे लगता है तुम कुछ कहना चाहते हो मैंने इतना चुप तुम्हे कभी नहीं देखा
मैंने कुछ चोंक कर अनुष्का की और देखो मानो  किसी ने मुझे किसी गहरे सपने से जगा  दिया हो ,
 मैंने कुछ देर चुप रहने के बाद , दबी दबी सी आवाज़ में  कुछ देर सोचा और कहा, " नहीं कुछ नहीं, I M OK ,
अनु ने कहा , देखो ये बात सही नहीं है मैं हमेशा तुम्हे सब कुछ बताती हूँ, और तुम कभी कुछ नहीं बताते , और मैं जानती हूँ तुम कहना चाहते हो , तो तुम मुझे बता सकते हो
ये सुन मैं फिर चुप रहा, मेरी कुछ देर की चुपी के बाद अनु ने फिर से कहा , " तो तुम बता रहे हो

पर मैं  कुछ भी कहने की हिम्मत जुटा ही नहीं पा  रहा था,  फिर एक bite खाकर और ice tea की दो sip के बाद मैंने कुछ हिम्मत जुटाई, मेरे पैर काँप रहे थे , दिल की धड़कन तेज़ी से भाग रही थी. मेरी नसों में खून जम सा गया था.  हिल ही नहीं पा रहा था।  सिर्फ ये सोच कर की अब कहूँगा तोह उसके बाद क्या होगा, पर कहना तो था.

और फिर थोड़ी हिम्मत जुटाकर मैंने कहा , " अनु , मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

अनु ने कहा , " हाँ बोलो
मैंने अपने शब्दों को कुछ रोक रोक कर कहा, " अनु, i think i like you. and i like u more than a friend , हाँ अनुष्का मैं तुमसे प्यार करता हूँ ये बात मैंने आज कह तो दी थी ,

पर मेरे ये कहने पर अनु कुछ देर के लिए चुप हो गयी, मुझे डर था की कहीं ये चुपी के तूफ़ान में मेरे बिछाये  गए दिल के टुकड़े बिखर न जाये।
कुछ  चंद लम्हों तक हमारे बीच छुपी छायी रही और मैं  इंतज़ार कर रहा था. कि मेरे प्यार के बिछाये टुकड़े न सिमट रहे थे और न उड़ रहे थे
कुछ देर उसे चुप बैठा देख, मैंने भारी सी सांस भरी और कहा , " देखो burger तो खत्म करो और मैं जानता हूँ अनुष्का तुम किसी और को चाहती हो पर मैं बस अपने दिल  बताना चाहता था.

उसने हलकी सी सांस भर , बस हम्म्म,कहकर जवाब दिया।
मैं नहीं जानता वो कुछ कहना भी चाहती है या नहीं, बहुत देर तक कोई जवाब न मिलने  बाद मैंने उसके हाथो को अपने हाथो में लेकर कहा, " relax अनु तुम्हे कुछ कहने की जरुरत नहीं पर मैं  एक अच्छे दोस्त की तरह हमेशा तुम्हारे साथ , तुम्हारे आस पास रहूँगा।
और मैं अपने बिछाये हुए प्यार के टुकड़ो को समेट उसे अपनी नीली बाइक पर बिठा  उसके pg की और चल पड़े

रास्ते में काफी देर तक दूर तक वो भी चुप रही और मैं भी सोचता रहा , कहीं मैंने कुछ जल्दी या कुछ ऐसा तो नहीं किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था।
मेरे दिमाग में सोच के घोड़े दौड़ ही रहे थे की तभी हर  बार की तरह अपनी प्यारी मुस्कुराती आवाज़ में बोली ,
सुबह तुम मुझे 6 बजे लेने आ जाना , कल सुबह लेने आओगे न

हाँ जरूर, " मैंने झट से बोला मानो  जैसे मैं न जाने कब से उसके कुछ कहने का इंतज़ार कर रहा था

आज उसे छोड़ के जाने का मन न था, आज लगता था जैसे मैं अपने घर की और नहीं शायद अपना घर छोड़कर जा रहा था।
और अब मेरे पास 1 आखरी दिन था , उसे देखने महसूस करने का ,बस एक दिन था।

ट्रेनिंग का आखरी दिन जब हर चहरे पर एक ख़ुशी का आसमान था जैसे आज सब आज़ाद हो उड़ने की तयारी में हो और मैं आज आसमान से जमीन की और गिर रहा था , आज मैं अपनी उदासी भी छुपा नहीं पा रहा था ,
अनु आज माथे पर लाल बिंदी और सुलझे बालो में गजब की सुन्दर लग रही थी , मैं उसे अंतहीन लम्हों तक देखना चाहता था पर आज समय की सुइयां बहुत तेज़ी से भाग रही थी , सुबह से कब शाम हो गयी पता ही नही चला।
मैं जानता था हम बिछड़ने वाले है , और मैं इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था , और आज मेरी  उसे उसकी PG वाली गली के बाहर अलविदा कहने की हिम्मत सी न थी , ट्रेनिंग खत्म होने पर मैं वहां से शायद किसी को भी अलविदा कहे बिना जाने वाला था , पर तभी अनु मेरे पास आई और कहने लगी तो चले , " और अब जब अनु ने कह ही दिया था फिर तो जाना ही था।

हम आज आखरी बार फिर पहली बार की तरह रास्ता भूलते हुए उसके घर की और चल पड़े , कुछ आधा घंटा बाद हम घूमते फिरते उसकी झीनी झीनी खुश्बू के साथ मीठी मीठी बातें करते उसके घर के बाहर पहुंचे

उसे अलविदा कहने से पहले मैंने हलकी सी आवाज़ में बेबाकी से पूछा , " अनु, हम फिर मिलेंगे न ,
अनु ने अपनी वही मीठी मुस्कराहट देते हुए कहा , " हाँ , हम जरूर मिलेंगे।

और फिर एक बार मैं अपना घर छोड़ किसी और  घर चल पड़ा जहाँ मैं रहता था।

आज आँखें बहुत नम  थी मेरी , पर उसके फिर मिलने के वादे से मैं कुछ दिलासा लिए घर की ओर जाता रहा।

पर आज एक बहुत अंतहीन सा वक़्त हो चुका  है उसे देखे सुने पर जैसे लोग शादी में अग्नि को साक्षी मानकर जन्मो जन्मो का रिश्ता एक दूजे के साथ बाँध लेते है बस उसी तरह मैंने भी अनु को साक्षी मान  अपने आस पास हवाओं में,  अपनी साँसों में बसा लिया है , उसकी वो झीनी झीनी खुश्बू मैं आज भी हवाओं में महसूस करता हूँ।
हम उसके बाद कभी नहीं मिले ,  पर मैं आज भी उसकी  हम्म्म को हाँ समझ कर एक एहसास में जी रहा हूँ  ,  मैंने उसे अपने दिल और धड़कन से  कभी बाहर  ही नहीं आने दिया ।

सच तो ये है ये सांसें अब  सिर्फ तेरे नाम की
तेरा नाम लेकर न निकले
तो ये किस काम की।


                                             




   



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