रविवार, 17 फ़रवरी 2013

FIST OF MY DREAM



Mere Sapno ki Muthi (Fist Of My Dream)

सपने देखे थे जो कुछ आपने
थमा दिए कुछ मेरे हाथ में

सपने थे जो मेरे
बंद मुठी से घिरे

आज भी कभी कभी
छुप छुप  कर देखता हूँ मैं उन्हें

मेरी हाथों की उँगलियों में जागते
लिखते, हँसते,उदास  होते
तो कभी गहरी नींद में सोते

मेरे  हाथों को प्यार से सहलाते, गुदगुदाते हैं आज भी

सपने थे जो मेरे
बंद मुठी से घिरे

 ये सपने आपसे अनजान थे
आप भी कहाँ इन्हें थे पहचानते

एक बार मेरे साथ मेरे सपनो में जो जागते
तो जान जाते

क्या थे सपने मेरे
बंद मुठी से घिरे ....
























































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