बुधवार, 7 मार्च 2012

aag aur andhera.........(fire and night)

आग और अँधेरा 

धीमे पांव से
बेशोर सी
बूंदों की आहटों में आना


तेरी यादों में जले
धुंए से भरे
मेरे घर को भुजाना


धीमी हवाओं से
एक छोर सी
पत्तो की सरसराहट में आना

ख़ाक हुए तेरे सपनो को
राख हुए मेरे घर को
धीमे से उड़ा ले जाना


मिल जाऊ जो मैं  भी कहीं
उन यादों की राख में
ले मुझे किसी तट पर
बहा देना

धीमे पांव से बेशोर सी आना .......








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